पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि सेवाक्षेत्र पर केंद्रित उपायों की सिफारिश करने हेतु एक उच्च-स्तरीय ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यमिता’ स्थायी समिति का गठन किया जाएगा।
बजट दस्तावेज़ों के अनुसार उच्च-स्तरीय स्थायी समिति की संदर्भ शर्तें
- उन सेवाक्षेत्र उप-क्षेत्रों की पहचान करना जिनमें विकास, रोजगार और निर्यात की संभावनाएँ हैं।
- उभरती प्रौद्योगिकियों, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भी शामिल है, का रोजगारों और कौशल आवश्यकताओं पर प्रभाव का आकलन करना।
- विद्यालय स्तर से ही शिक्षा पाठ्यक्रम में एआई को सम्मिलित करने और शिक्षक प्रशिक्षण हेतु राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषदों को उन्नत करने के लिए विशिष्ट उपाय प्रस्तावित करना।
- अनौपचारिक कार्यप्रवाह को दृश्य, सत्यापन योग्य और भविष्य-उन्मुख बनाने के उपाय प्रस्तावित करना, ताकि ऊर्ध्व गतिशीलता की संभावनाएँ बढ़ सकें।
- देश में कुशल प्रवासी भारतीयों और विदेशी प्रतिभाओं को आकर्षित करने हेतु कदम सुझाना।
समिति की आवश्यकता
- स्वचालन के कारण रोजगार की हानि: एआई के प्रभाव से रोजगारों पर बढ़ती चिंताओं के चलते विभिन्न क्षेत्रों में कर्मचारियों की छंटनी हो रही है और उद्यम तीव्रता से स्वचालन की ओर बढ़ रहे हैं।
- क्षेत्रीय मानचित्रण: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने श्वेत कॉलर कार्यक्षेत्र से बाहर रोजगारों का व्यापक क्षेत्रीय मानचित्रण करने का आह्वान किया था, जिनमें उच्च कौशल की आवश्यकता होती है लेकिन वे कम स्टाफ वाले हैं। यह अर्थव्यवस्था में नए रोजगारों का प्रायः उपेक्षित स्रोत है।
- रोजगारों पर एआई के जोखिम को कम करना: नीतिगत सुधार वर्तमान रोजगारों पर एआई के संभावित जोखिमों को कम कर सकते हैं।
भारत में रोजगारों पर एआई का प्रभाव
- नियमित, दोहराव वाले कार्य सबसे अधिक संवेदनशील: बीपीओ/ग्राहक सेवा, बुनियादी लिपिकीय कार्य, असेंबली लाइन कार्य और नियमित लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों की भूमिकाएँ एआई-संचालित स्वचालन द्वारा अत्यंत सीमा तक कम की जा सकती हैं।
- पारंपरिक मध्यम-कौशल रोजगार : जो ऐतिहासिक रूप से स्थिर रोजगार प्रदान करती थीं, वे भी स्वचालन के कारण प्रभावित हो रही हैं।
- आईटी और आउटसोर्सिंग: एआई उपकरण कोडिंग, परीक्षण और समर्थन कार्य जैसे कार्यों को तीव्रता से संभाल रहे हैं, जिससे प्रमुख आईटी कंपनियों एवं आउटसोर्सिंग कंपनियों में कार्यबल का पुनर्गठन हो रहा है।
उभरते अवसर
- उभरती प्रौद्योगिकियाँ नई रोजगार श्रेणियाँ बना रही हैं जो पहले अस्तित्व में नहीं थीं, जैसे: एआई/एमएल इंजीनियर, डेटा वैज्ञानिक और विश्लेषक, क्लाउड आर्किटेक्ट, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, एआई उत्पाद प्रबंधक एवं प्रॉम्प्ट इंजीनियर।
- ये भूमिकाएँ प्रायः उच्च वेतन प्राप्त करती हैं और इनकी माँग तीव्रता से बढ़ रही है।
- पूर्वानुमान बताते हैं कि आगामी वर्षों में लाखों नई तकनीकी रोजगार जुड़ सकते हैं, संभावना है कि 2027 तक भारत में लगभग 4.7 मिलियन एआई/टेक भूमिकाएँ उभरेंगी।
- कौशल माँग में परिवर्तन : 2030 तक भारतीय कार्यबल का लगभग 38% कौशल आवश्यकताओं में बदलाव का अनुभव कर सकता है, जो ब्रिक्स देशों में सबसे अधिक है।
- पारंपरिक शैक्षणिक प्रमाणपत्र रोजगार क्षमता के पूर्वानुमान में कम प्रभावी हो रहे हैं; भर्तीकर्ता तकनीकी कौशल, विश्लेषणात्मक क्षमताओं और अनुकूलनशील सीखने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
आगे की राह
- कौशल उन्नयन और पुनःकौशल अनिवार्यता: भारत को नए रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप बड़े पैमाने पर पुनःकौशल की आवश्यकता है। अनुमान है कि 2027 तक 1.6 करोड़ से अधिक श्रमिकों को एआई और स्वचालन प्रौद्योगिकियों में पुनःकौशल की आवश्यकता होगी।
- सरकार और उद्योग की पहलें: राष्ट्रीय रणनीतियाँ और साझेदारियाँ छात्रों और श्रमिकों को एआई एवं तकनीकी दक्षताओं से लैस करने पर केंद्रित हैं।
- बड़े पैमाने पर कॉर्पोरेट कौशल-निर्माण पहलें कार्यबल की तैयारी को बढ़ावा देने के लिए चल रही हैं।
निष्कर्ष
- यद्यपि कुछ पारंपरिक भूमिकाएँ घटेंगी या परिवर्तित होंगी, नए अवसरों का एक गतिशील परिदृश्य खुल रहा है जो उन्नत तकनीकी क्षमताओं, सतत सीखने और अनुकूलनशीलता को पुरस्कृत करता है।
- यह संक्रमण सरकार, उद्योग और शैक्षिक प्रणालियों के समन्वित प्रयासों की माँग करेगा ताकि भारत का कार्यबल भविष्य के कार्य हेतु तैयार हो सके।
सरकारी पहलें
- फ्यूचरस्किल्स PRIME (राष्ट्रीय पुनःकौशल एवं कौशल उन्नयन मंच): इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा NASSCOM के साथ साझेदारी में एक प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम, जो आईटी पेशेवरों एवं युवाओं को एआई सहित 10 नई और उभरती प्रौद्योगिकियों में कौशल उन्नयन/पुनःकौशल प्रदान करता है।
- स्किल इंडिया मिशन: भारत का व्यापक स्किल इंडिया मिशन अब विभिन्न एआई/टेक घटकों को शामिल करता है। यह एआई कौशल के प्रारंभिक परिचय को प्रोत्साहित करता है और व्यावसायिक मार्गों को भविष्य की तकनीकी भूमिकाओं में रोजगार क्षमता से जोड़ता है।
- राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (NCVET): इसने राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (NPAI) कौशल ढाँचा विकसित किया है, जो एआई, डेटा विज्ञान एवं उभरती प्रौद्योगिकियों में कौशल विकास हेतु राष्ट्रीय रोडमैप, संरचना और दिशा-निर्देशों को रेखांकित करता है।
- MSDE पहल – SOAR (एआई तत्परता के लिए कौशल विकास): विद्यालयी छात्रों (कक्षा 6–12) में एआई जागरूकता और बुनियादी कौशल को सम्मिलित करने तथा शिक्षकों में एआई साक्षरता विकसित करने हेतु राष्ट्रीय स्तर की पहल।
- प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT): IBM इंडिया, माइक्रोसॉफ्ट, सिस्को, एडोबी इंडिया, अमेज़न वेब सर्विसेज़ (AWS) आदि के साथ CSR के अंतर्गत कौशल पहल हेतु सहयोग।
- क्षेत्रीय कौशल परिषद (SSCs): सक्रिय उद्योग और वैश्विक क्षेत्रीय भागीदारी के साथ गठित, जो पाठ्यक्रम का सह-विकास करते हैं तथा प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण संचालित करते हैं।
- प्रमुख उद्योग साझेदार पाठ्यक्रम समर्थन प्रदान करते हैं और एआई, रोबोटिक्स तथा क्लाइमेट टेक में प्रशिक्षुता/इंटर्नशिप समर्थन उपलब्ध कराते हैं।
स्रोत: IE
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